प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आज गणेश चतुर्थी का पावन पर्व, और योग संयोग ऐसा अद्भुत है, कि बुधवार को गणेश चतुर्थी आ रही है, गणेश जी को प्रथम पूज्य कहा गया है, वह हमें बुद्धि प्रदान करते हैं,
उनका शीश बड़ा है, वे विचारवान है, उनके कान बड़े हैं, वे सब को धैर्य से सुनने वाले हैं,
सुनते वे सबकी है, मगर धैयपूर्वक अंतिम फैसला बुद्धि से करते हैं, हिंदू धर्म ग्रंथो में
उनका प्रथम स्थान है, मनुष्य में बुद्धिमत्ता जगाने वाले हैं, अगर हममें बुद्धि ही जागृत नहीं होगी, तो हम लौकिक या पारलौकिक दोनों ही कार्यों में असफल हो जायेंगे, जो भी बुद्धिमान हैं, वह अपने समस्त कार्यों का आरंभ उनके श्री चरणों का वंदन करके करते हैं, वे प्रथम पूज्य हैं, और वे प्रथम पूज्य इसलिए भी हैं, क्योंकि उनकी बुद्धि तीक्ष्ण है,
वे त्वरित निर्णय करने वाले हैं , जिस किसी
भी व्यक्ति में बुद्धि जागृत नहीं होती, वह फिर कोई भी सही निर्णय करने में सक्षम नहीं होता, बुद्धि का जागरण करने वाले, प्रथम पूज्य, श्री गणेशजी के चरणों में सादर वंदन,
जो भी सच्चे हदय से उनकी शरण में आता है, उसे वे बुद्धि, खास तौर से व्यवहार कुशल भी वे बनाते हैं, ऐसे सभी भक्तों को अपनी शरण में लेने वाले गणेश जी की आरती ही इस प्रकार प्रारंभ होती है, मंगल मूर्ति मोरया, वे मंगल की मूर्ति है, वे मंगल को ही प्रदान करने वाले हैं, जीवन में बुद्धि और शौर्य दोनों प्रदान करने वाले हैं, जिसके जीवन में विनम्रता है, उसके लिये फिर कुछ भी कठिन नहीं, जो भी विनम्र हैं, वह सभी समस्त लोगों के बीच में अपनी विनम्रता के कारण भी लोकप्रिय हो जाते हैं, ऐसे प्रथम पूज्य, श्री गणेश जी की
स्थापना आज हर घर में ,गली में, सार्वजनिक गणेश उत्सव के रूप में, एक आल्हाद सबके मन में जगाती है, आज से कई वर्ष पूर्व स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक, उन्होंने सभी को एकजुट करने के लिये इस सुंदर उत्सव की शुरुआत की, हमारा संपूर्ण भारतीय दर्शन उत्सव प्रिय है, इसमें पल-पल पर त्यौहार है, जो हमें यह सिखाते हैं, उत्साहपूर्वक जीवन जीना, यही सबसे उत्तम धर्म है, हर समय प्रसन्न चित्र रहकर , सभी परिस्थितियों का सामना करते हुये समस्त समाज को एकजुट बनाये रखना, ऐसा यह उत्तम पर्व है, जिस प्रकार के भाव को लेकर
श्री बाल गंगाधर तिलक ने दिव्य व भव्य आयोजन की शुरुआत की थी, वह आज संपूर्ण भारतवर्ष में बड़े उत्साह से मनाया जाता है, सभी और जनता का उत्साह देखते ही बनता है, अगर हमारे जीवन में सब हो, और उत्साह ना हो, तो फिर जीवन में एक नीरसता आने लगेगी, इसलिए लोक मंगल का
यह अद्भुत पर्व है, जो हमें बुद्धि व उत्साह दोनों को प्रदान करने वाला है, आज संपूर्ण देश में यह परंपरा अपने दिव्य व भव्य स्वरूप में मनाई जाती है, संपूर्ण भारतवासी, सनातन धर्म का जो भी अवलंबन ग्रहण करते हैं, उन सभी को सादर वंदन, गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
मंगल मूर्ति मोरया,
जय गणेश काटो क्लेश।
भारत माता की जय,
जय हिंद।
आपका अपना
सुनील शर्मा।
विशेष:- लोक कल्याण को ध्यान में रखकर
इस सुंदर पर्व को बाल गंगाधर तिलक जी ने शुरू किया था, आज पुनः इस पर्व पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं व समाज का मंगल किस प्रकार हो, यह बुद्धि सभी को श्री गणेश जी प्रदान करें, इस पर्व का मूल भाव हम ग्रहण करें , बाल गंगाधर तिलक, उनके प्रति हमारी सच्ची आस्था अगर है, तो लोक कल्याण की जिस भावना से उन्होंने इसकी स्थापना की थी, वह मर्म हम सभी समझे।
आयोजन दिव्य व भव्य दोनों ही हो, भव्यता है व दिव्यता दोनों का ही समावेश इस त्यौहार में होना चाहिये।
पुनः आप सभी को गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की अनंत हार्दिक शभकामनाएं।
।