मां की ममता भी बड़ी अजीब होती है।
हमेशा कमजोर बच्चे के साथ खड़ी होती है मां।
उलाहने सुनती है जमाने से, पर ममता की चादर उड़ाती है अपने कमजोर बच्चे पर और अधिक।
निरंतर उसका ध्यान रखती है, क्या करें मां की ममता ऐसी ही होती है।
इसमें मिट्टी की सोंधी महक है, एक गमक है, स्त्रीत्व के प्यार की मिसाल है, प्रकृति का वरदान है मां।
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आज हमने देखा है कुछ इन निगाहों में ,
कहना तो बहुत कुछ चाहती है ये निगाहें, लेकिन कुछ कहने से घबराती है ये निगाहें।
देखो कैसी है इनकी यह दिलफरेब अदाएं ,
निगाहे तुम्हारी ये जान ले लेगी हमारी ,
खामोश जुबाँ है ,मगर निगाहों से सब कुछ होता बयाँ है,
तुम्हारे दिल में क्या है, उसका आईना है निगाहें ,
कहना तो बहुत कुछ चाहती है यह निगाहें।
है किसी पर मेहरबाँ ये निगाहें ,पर उसका नाम जुबाँ पर कभी न ला पाए।
एक अनसुलझी सी पहेली है तुम्हारी निगाहें ,
रास्ता यह किसका देखती है तुम्हारी निगाहें ,आज राज़ सबकुछ जाहिर कर रही हैं ये निगाहें।
प्रेम का अथाह सागर है तुम्हारी निगाहें,
कहना तो बहुत कुछ चाहती है यह निगाहें, लेकिन कुछ कहने से घबराती है ये निगाहें।
धधक रही है सीने में आग कोई ,
बह रहा है लावा भीतर ही भीतर गहरे कही मन में,
डर है कही ये ज्वालामुखी फट ना जाए ,
क्योंकि अगर ये ज्वालामुखी फट गया ,
तो निश्चित ही तबाही तो लाएगा,तो निश्चित ही तबाही तो लाएगा,
पर संतोष इस बात का है कि विचारों से शून्य बंजर धरती पर,
विचारों की हरित क्रांति के बीज बो जाएगा,विचारों की हरित क्रांति के बीज बो जाएगा।
क्योंकि मशहूर है ,ज्वालामुखी जब फटता है ,
तो तबाही लाता है किंतु ज्वालामुखी से निकलता लावा ,
बंजर भूमि को उपजाऊ बना जाता है,बंजर भूमि को उपजाऊ बना जाता है।
नवंबर 23, 2016
समाज आज एक छल तंत्र की ओर बढ़ रहा है
प्रजातंत्र खत्म हुआ।
अराजकता बढ़ रही, बुद्धिजीवी मौन है या चर्चारत
हे कृष्ण फिर से गीता सुनाओ कर्तव्य पथ पर हमें चलाओ
फिर से कई दुशासन कर रहे सामाजिकता का चीरहरण
फिर से मुकदर्शक बन बैठे हैं भीष्म पितामह
द्रोणाचार्य फिर कौरवों के खेमे में है
जागो जागो हे जनता जनार्दन की सामाजिकता का चीरहरण हुआ जाता है
नैतिक मूल्यों की दे रहे बलि जो वे धर्म का जयघोष लगाते हैं
हे कृष्ण आओ फिर से पांडवों के पक्ष में अर्जुन (जनता) के सारथी बन उन्हें धर्मयुद्ध हेतु प्रेरित करो जगाओ
हे अर्जुन अब तुम भी जागो
समय पुकारता, सत्य पथ पर खड़े हो जाओ,
साक्षी है, महाभारत कि जीत सदैव सत्य की हुई है।
सामाजिक सत्य आज का, सब भीरु से खड़े हैं शीश झुकाएं,
जागो जनता जनार्दन जागो कई अर्जुनो की ज़रूरत है इस महासंग्राम में।
नवंबर 20, 2016
नवंबर 19, 2016





