प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, जैसी संगत,
वैसी रंगत, हम अपने जीवन में जिस प्रकार के व्यक्ति की संगत में रहते हैं, वैसा ही परिणाम
हमें प्राप्त होता है, इसलिए सदैव अपनी संगत के प्रति सचेत रहें, भूल कर भी गलत संगति न
करें, वरना उसके गलत परिणाम आपको भोगना पड़ेंगे, क्योंकि जिस प्रकार की संगत में हम रहते हैं, धीरे-धीरे उस प्रकार की आदतें हमारी भी बनने लगती है, अगर हम अच्छी संगत में रहेंगे, तो हमारे जीवन में निरंतर प्रगति होगी, और हमारी संगत अगर अच्छी नहीं होगी, तो हमारे जीवन में निरंतर कठिनाइयां बढ़ेंगी, इसको हम इस प्रकार समझे, अगर हम अच्छे लोगों की संगत में रहेंगे, तो वहां से अच्छे गुण हम सीखेंगे, व उनका अपने जीवन में उपयोग करेंगे व इस कारण हम अपने जीवन में सफलता की और अग्रसर होंगे, और अगर हमारी संगति सही नहीं हुई, गलत संगति हुई, तो हमारी गलत संगत के कारण हम उनके गलत गुणों को सीखेंगे व हमारा जीवन कठिनाईयों की और बढ़ेगा, अगर हमें या किसी को भी
जीवन में निरंतर प्रगति करना है, तो सबसे पहले उसे अपनी संगति में सुधार करना होगा, अच्छे विचारों व आचरण वाले व्यक्तियों की संगति करना होगी तो धीरे-धीरे हमारे जीवन में भी उनकी संगति के प्रभाव से हमारे जीवन में भी उनके जैसी अच्छे विचारों व आचरण का प्रभाव बढ़ेगा वह हम भी उनके जैसे गुणों को जीवन में अपनाएंगे तो हमारा जीवन
एक अच्छी दिशा की ओर बढ़ता जायेगा,
इसलिए हमें चाहिए, हम स्वयं तो सही संगति करें ही, और बाकी लोगों को भी प्रेरित करें,
ताकि समाज में स्वस्थ मूल्यों व विचारधारा वाले लोगों का प्रभाव व वर्चस्व कायम हो,
और संपूर्ण समाज अभिवृद्धि की और अग्रसर हो, हमें अपनी भूमिका को गहराई से समझना होगा, क्योंकि हमारी जैसी संगति होगी, इसका असर हमारे ऊपर तो पड़ेगा ही, परिवार व समाज पर भी इसका प्रभाव आता है।
विशेष:- संगति का प्रभाव पड़ता ही है, इसलिए सदैव अच्छी संगति करें, जिससे हमारा स्वयं का, परिवार का, समाज का
कल्याण हो, वह एक अच्छी सामाजिक संरचना में हमारा योगदान हो, क्योंकि जैसी संगत ,वैसी रंगत।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।