प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, वितरण पर,
यानी किसी भी वस्तु या साधनों का वितरण
हम किस प्रकार करें, यह बहुत महत्वपूर्ण है।
और अगर हमें यह सीखना है तो प्रकृति से बड़ा शिक्षक कोई नहीं, प्रकृति हमें सिखाती है की वितरण असमान रूप से न करके सभी के बीच समान रूप से किया जाये, उसकी मिसाल हम सूर्य , पृथ्वी, जल, वायु, आकाश
इन सभी से प्राप्त कर सकते हैं, यह सभी को समान रूप से उपलब्ध है, इनके वितरण में कोई असमानता नहीं है, कोई अमीर- गरीब,
ऊंच-नीच, अपना -पराया ऐसा कोई भी भेद नहीं है, जब प्रकृति ने इतनी सुंदर व्यवस्था हमें प्रदान की है, तो हम उससे यह क्यों नहीं सीखते, मनुष्य अपने स्वार्थ के कारण उपलब्ध साधनों के वितरण में गड़बड़ी करता है, और असंतुलन को जन्म देता है, मनुष्य अपने स्वार्थ को परे रख सके, तो बहुत सारी व्यवस्थाएं स्वयं सुचारू रूप से चलने लगेंगी,
जब साधनों के वितरण में असमानता उत्पन्न होती है, तो समाज में रोष उत्पन्न होता है, व
असमान वितरण के कारण सामाजिक संतुलन बिगड़ता है, इसकी जवाबदारी
निश्चित रूप से सबसे अधिक राजनीतिक लोगों की है, मगर क्या उन्हें चुनकर हम ही लोग नहीं भेजते, तो हमारा चुनाव ऐसे राजनीतिक लोगों का होना चाहिए, जो
निष्पक्ष व समान वितरण किस प्रकार हो,
वह व्यवस्था बनाने में सहायक हो, न कि
वह असमान वितरण में सहयोगी हो, अच्छी विचारधारा वाले लोगों को चुनने का जो अधिकार हमें प्रजातांत्रिक व्यवस्था ने दिया है,
हम उसका उपयोग सही राजनेताओं को चुनने में करे, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल के हो, मगर उनकी विचारधारा व कार्यशैली अच्छी होनी चाहिए, जो समाज में सही वितरण को , साधनों को किस प्रकार बांटा जाए, ताकि समाज के आधिकाधिक वर्ग तक
समस्त साधन पहुंच सके, जितना समान रूप से समाज में वितरण होगा, उतना ही समाज
सशक्त होगा, वितरण प्रणाली इस प्रकार विकसित की जाए की जो समाज में पिछड़े व निम्न वर्ग के लोग हैं, वे भी अपने स्वाभिमान के साथ मुख्यधारा में शामिल हो।
विशेष:- कोई भी समाज या देश उसके नागरिकों से बनता है, किसी भी देश राजनीतिक कार्यक्रम इस प्रकार के होने चाहिए, जो साधनों के समान वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित कर सके, तभी समाज व देश सशक्त होगा, व मानवीय मूल्यों की भी
सुरक्षा होगी।