प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आशा है आप सभी को मेरा यह ब्लॉग पसंद आ रहा होगा, मैंने अपनी ओर से संपूर्ण कोशिश की है, कि मैं विविध विषयों का इसमें समावेश कर सकूं, कहां तक सफल रहा, यह तो आप पर निर्भर है, आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे , प्रतिफल पर, हम जीवन में जो कुछ भी करते हैं, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, हमें हमारे कर्म का प्रतिफल अवश्य मिलता है, तो हम किस प्रकार के कर्म करें, ताकि उन कर्मों को करने का जो प्रतिफल हमें प्राप्त हो, वह सुखद हो, इसके लिए हमारे कर्मों का चयन इस प्रकार होना चाहिए, हम जो भी कर्म करें,
उससे हमें लाभ अवश्य हो, मगर उससे किसी की हानि न हो, हम एक संतुलन के रूप में
हमारे प्रत्येक कर्म को करें, ताकि जो भी प्रतिफल हो, वह अच्छा हो, साथ ही हम हमारे साथ-साथ समाज के लिए भी कुछ ऐसा कार्य अवश्य करें, जिससे समाज को लाभ पहुंचे,
अगर समाज आपसे लाभान्वित होता है, तो समाज की सकारात्मक ऊर्जा आपकी और
प्रतिफल के रूप में आपको प्राप्त होंगी।
हमें हमारा कर्म तो अच्छी दिशा मैं रखना ही है, साथ ही जो लोग हमसे जुड़ें है, वे चाहे परिवार के हो या समाज की, उन्हें भी अच्छी दिशा में प्रेरित करना, यह भी एक पुण्य का कार्य है, क्योंकि जब अधिकतम सकारात्मक ऊर्जा एक साथ सही दिशा की ओर जाएगी,
तो उसका प्रतिफल भी उतना ही उत्तम हमें प्राप्त होगा।
विशेष:- हम कर्म करते समय यह सावधानी अवश्य रखें, कि हम जो भी कर्म कर रहे हैं,
उससे हमें लाभ हो, मगर किसी को हानि न हो, एक संतुलित दृष्टिकोण से हम अपना कर्म करें, तो फिर उसका अच्छा प्रतिफल ही हमें प्राप्त होगा।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।