प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
प्रवाह की इस वैचारिक श्रृंखला में आप सभी का स्वागत है, आज की हमारी चर्चा का विषय है, नींव,
अगर नींव मजबूत है, तो इमारत अवश्य टिकेगी, यह केवल इमारत के बारे में ही नहीं है, इसका हमारे व्यक्तित्व से भी लेना-देना है,
अगर परिवार में हमें संस्कारों की नींव प्रदान की है, तो हमारा व्यक्तित्व सुदृढ़ होगा, इसी प्रकार किसी परिवार की नींव उसके नेतृत्व
कर्ता की सूझबूझ पर निर्भर करती है, उसके फैसले इस प्रकार से समझदारी वाले होना चाहिए, जो परिवार की नींव को मजबूत करें।
क्योंकि जिस परिवार की नींव मजबूत है, इसकी इमारत भी उतनी ही बुलंद होगी, इसके लिये नेतृत्व कर्ता को हमेशा ऐसे कदम उठाना चाहिए, जिससे आपसी तालमेल में वृद्धि हो,
उसका कोई भी कदम सभी की अभिवृद्धि के लिए उठे, किसी भी समाज व राष्ट्र की नींव
उसके नागरिक होते हैं, वह कितने अपने विचारों के प्रति सतर्क हैं, कैसा उनका आचरण है, व राष्ट्र व परिवार के प्रति बलिदान के लिए समर्पित है, तो वह एक
सुदृढ़ नींव का निर्माण कर रहे हैं।
नींव अगर कमजोर है, तो कितनी भी खूबसूरत इमारत हो, वह नहीं टिकती है,
इसी प्रकार परिवार में अगर संबंधों की नींव को मजबूती से रखा जाए, तब ही परिवार भी बुलंदी को छूएगा।
विशेष:- अगर नींव मजबूत है, तो इमारत टिकती है, इस प्रकार राष्ट्र व परिवार में
अगर संस्कारों की नींव मजबूत है, तो परिवार व राष्ट्र टिकेंगे, यही नींव का महत्व है।