प्रिया पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, सुविधा पर,
आज का मनुष्य सुविधा भोगी बन चुका है,
अत्यधिक सुविधा के कारण वह आलसी बनता जा रहा है, और श्रम से दूर रहने के कारण उसका स्वास्थ्य भी बिगड़ता जा रहा है।
जीवन में मनुष्य की मूलभूत सुविधा रोटी, कपड़ा और मकान है, पर आज हमारे देश में
कई लोग मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है, वहीं दूसरी और ऐसा वर्ग भी है, जो विलासिता की सुविधाओं से परिपूर्ण है,
इनके पास आलीशान जीवन जीने की सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
आज एक तरफ देश में कई लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है, जो की एक सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है,
स्वास्थ्य संबंधी, शिक्षा संबंधी सुविधा उपलब्ध कराना हर सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय है, व सरकारी अस्पतालों की भी स्थिति कुछ अधिक अच्छी नहीं कही जा सकती, जबकि यह मूलभूत आवश्यकता व सुविधाओं में से एक है।
एक और बात विचारणीय है, हमें जितनी अधिक सुविधा प्राप्त होती है, उतने ही हम और सुविधाओं की उम्मीद लगा बैठते हैं,
आज विज्ञान के कारण हम कई ऐसी सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना ही नहीं की थी, इसका सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण मोबाइल है, हम आज मोबाइल से पूरी दुनिया से वार्तालाप व संपर्क कर सकते हैं, कोई सी भी जानकारी हम मोबाइल के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं, किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन भी हम
मोबाइल से कर सकते हैं, हम सूचना का आदान-प्रदान कर सकते हैं, क्या कुछ वर्षों पहले यह संभव था, यह वैज्ञानिक क्रांति के कारण संभव हुआ।
विशेष:- अत्यधिक सुविधा हमें निष्क्रिय कर देती है, हमें उतनी ही सुविधाओं को उपभोग करना चाहिए, जितनी हमारे लिए आवश्यक है, वरना स्वास्थ्य संबंधी समस्या हमें हो सकती है, अत्यधिक सुविधा जुटाने के फिर में हम कर्ज का शिकार हो सकते है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।