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प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
14 अप्रैल 1891 में जन्मे बाबा साहब अंबेडकर के बारे में दो दो शब्द। 
      बाबासाहेब अंबेडकर को उस  समय के सामाजिक न्याय की अलख जगाने वले क्रांतिकारी नेता के रूप में हम याद करें तो हम पाएंगे, उसे समय के सभी नेताओं से अलग उनकी स्वयं की गहरी सोच  व विचारधारा रही, जो उनके अपने जीवन में घटे घटनाक्रमों से उपजी, जहां पर बचपन में ही वह सामाजिक विषमता का सामना करते हैं, वह उनका बालमन इससे भीतर तक हिल जाता है, इस घटनाक्रम के चलते हुए मानसिक प्रण करते हैं कि सामाजिक विषमता जो न केवल उनके जीवन में, बल्कि उनके जैसे कई लोगों का जीवन बदतर बना रही है, और कोई इसके खिलाफ आवाज उठाने वाला नहीं है। 
                  बस फिर क्या था, उस बचपन में बीते घटनाक्रम ने उनकी अंतरात्मा को भीतर तक झकझोर दिया और फिर जो हुआ, वह कालांतर में एक बड़े विचारक, बड़े समाज सुधारक वह संविधान के नीति निर्माता के रूप में मानो उनका पुनर्जन्म होता है।
            उन्होंने अपने जीवन में घटे घटनाक्रम को एक सकारात्मक मोड़ दिया, वहां से  वे एक दिव्या विभूति के रूप में उभरे। 
               उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन काल में शिक्षा व सामाजिक चेतना को सर्वाधिक महत्व प्रदान किया, उनके जैसे विचारशील वह क्रांतादृष्टा नेता बहुत ही काम हुए हैं।
            उन्होंने उसे समय के जनमानस पर अपने विचारधारा की गहरी छाप छोड़ी, आज जब हमारा संपूर्ण  देश स्वार्थ पूर्ण राजनितिक हथकंडो में ही उलझ कर रह गया है।
           तब वे वर्तमान परिदृश्य में और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं, उन्होंने अपना तमाम जीवन सामाजिक संघर्ष करते हुए ही बिताया।
            तमाम विसंगतियों का सामना करते हुए वे सामाजिक प्रणेता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
           सदियों से चली आ रही गलत प्रथाओं का जिस  साहस से उन्होंने सामना किया वे स्वयं भी शिक्षित हुए, आज समय है हम 
उनकी मूल विचारधारा को समझें  कि क्यों सामाजिक संरचना में समरसता आवश्यक है।
           वे स्वयं दलित महार जाति से थे, जो उसे समय समाज में अस्पृश्य  मानी जाती थी।
        एक संविधान निर्माता के रूप में उनकी जो केंद्रीय भूमिका रही, व उस संविधान समिति के अध्यक्ष भी  वे रहे, इस प्रकार उनके व्यक्तित्व बहुआयामी रहा।
         उनका व्यक्तित्व हम सभी के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत है, उनके संविधान निर्माता के रूप में भी लक्ष्मी भूमिका रही व तत्कालीन परिस्थितियों की गहरी समझ के आधार पर उन्होंने समाधान के निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।
         सामाजिक उत्पीड़न व भेदभाव को उन्होंने स्वयं व्यक्तिगत जीवन में भी महसूस किया, तभी उनकी सोच एक परिपक्व व गहरे राजनेता के रूप में है, हमने हृदय से नमन करते हैं।
         उसे दौर में उनके द्वारा जो समाज में शिक्षा की अलख उन्होंने जगाई वह सामाजिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन उन्होंने किया ।
        आज हमें और अधिक गहराई से चिंतन करने की आवश्यकता है। यही हमारी बाबासाहेब अंबेडकर के जन्म दिवस पर उनके प्रति सच्ची कृतज्ञता होगी।
           उनका व्यक्तित्व काफी विराट था,  इसके कई आयाम थे।
उनका हृदय से प्रणाम वह भारत भूमि के ऐसे महान रत्कोन  शत-शत नमन। उन्होंने सामाजिक विषमता के खिलाफ जिस प्रकार से अपनी बात सशक्त तौर पर कहीं , आज फिर उनके जैसे व्यक्तित्व की देश को फिर आवश्यकता है। 
         आज के परिप्रेक्ष्य में हमारे उनके पति सच्ची कृतज्ञता यही होगी हम उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा प्राप्त करे वह आज के सामाजिक संदर्भ में समरसता और सामाजिक न्याय के लिए जो भी आवश्यक कदम है वह उठाए।
         ऐसे भारत माता के के महान सपूत, विचारक, क्रांति दृष्टा, 
सामाजिक क्रांति के प्रणेता जननायक बाबासाहेब अंबेडकर को 
शत शत नमन, जिन्होंने भारत के संविधान को इतनी  गहनता पूर्वक रचा वह उसने समय-समय पर संशोधन भी हो सके, ऐसा लचीला संविधान बनाया।
        वे युगदृष्टा थे, अपने समय के ऐसे महान विचारक वह सामाजिक क्रांति के अग्रदूत को पुनः उनके जन्मदिवस पर शत-शत नमन ।
जय हिंद। 
जय भारत। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा। 

              
         



प्रिय पाठक वृंद,
सादर नमन,

ईश्वर आप सभी का मंगल करें ,आपका जीवन समृद्ध व वैभवशाली हो। इन्हीं शुभ भावो के साथ आज अंतर्यात्रा भाग 19 प्रस्तुत करने जा रहा हूं।

इस विचार श्रंखला में आज विचार करेंगे धर्म का वैज्ञानिक महत्व ,क्या आप कभी सुबह 4:00 से 6:00 बजे के समय में उठते है,अगर नहीं उठते हैं तो कोशिश करिए ब्रह्म मुहूर्त में उठने की, मात्र 15 दिनों में आपको मानसिक अवस्था में एक सकारात्मक परिवर्तन आपको महसूस होगा।

इस मुहूर्त में उठकर आप सकारात्मक चिंतन, इष्ट साधना व रोज के कार्य का तरीका निश्चित कर सकते हैं। इस समय उठने पर आपकी मानसिक शक्तियां अधिक प्रभावी होती है, सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है।

हमारा शरीर भी ईश्वरप्रदत्त एक सुंदर सा यंत्र ही तो है। अगर आप इसे स्वस्थ व नियमों के आधार पर चलाएंगे तो स्वस्थ और सुखी जीवन जी सकेंगे।

वर्तमान समय चुनोतियों का समय है। हर तरफ अराजकता, भ्रष्टाचार व कथनी व करनी का अंतर स्पष्ट देखा जा सकता है। ऐसे विपरीत हालातों में हमें बुद्धि से अपने कार्यों को करना होगा।

अपने जीवन को एक व्यवस्थित क्रम देने के लिए आप सुबह जल्दी उठने का अभ्यास करें व अगर आप उठ रहे हैं तो बड़ी खुशी की बात है।

आप इस समय उठकर क्या करते हैं, ईश्वर चिंतन व अपने कार्यकलापों का अध्ययन कर उन पर नजर डालें, कम से कम आधा घंटा यानी 30 मिनट अवश्य अपने आप से वार्तालाप करें, उस वार्तालाप में अपनी रोजमर्रा की समस्त गतिविधियों का आकलन करें, कहां सुधार की आवश्यकता है, इसे जाने।

आप मानसिक तौर पर जितना सुदृढ़ होंगे, उतने ही आपके फैसले विवेक पूर्ण होंगे। इस समय सकारात्मक चिंतन करें पूर्ण पारदर्शिता से अपनी दैनिक जीवनचर्या का आकलन करें, आप स्वयम जान जाएंगे कि सुधार की जरूरत कहां है।

समय को पूर्ण रुप से सजग रहकर उसे विभिन्न हिस्सों में बांटे। कुछ समय स्वयं के लिए, फिर परिवार के लिए व समाज के लिए यह आपकी सुविधा वह कार्य पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे संयोजित करते हैं।

एक सूत्र = समय का सदुपयोग।

दूसरा सूत्र = सभी का सहयोग।

तीसरा सूत्र = आर्थिक स्थिति का सही आकलन आय व बचत का संयोजन।

चौथा सूत्र = आकस्मिक आपदा प्रबंधन हेतु एक निश्चित आर्थिक प्रबंधन।

पांचवां पुत्र = अपनी आय मे सेें दान व बचत दोनों ही सुनिश्चित करें, दैनिक दान व बचत की आदत का समावेश करें।

छठा सूत्र = सभी के लिए प्रार्थना करें, इससे आपको भी आंतरिक प्रसन्नता का अनुभव होगा व सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होगा।

सातवां पुत्र = लक्ष्यहीन जीवन में कुछ छोटे ही सही लक्ष्य अवश्य हो, ताकि वे आपके लिए प्रेरणा का कार्य कर सकें।

आठवां सूत्र = विषम परिस्थितियों में पूर्ण धैर्य पूर्वक कार्य करे।

नवा सूत्र = जो भी कार्य करें, उस समय मन व शरीर दोनों को उसी कार्य में पूर्ण रूपेण लगाने का अभ्यास करें।

दसवा सूत्र = किसी भी धर्म ग्रंथ, गुरु या सकारात्मक चिंतन को निरंतर पूर्ण मनोयोग से 10 या 15 मिनट तक अवश्य कहे, यह आपका आत्मबल और मानसिक बल बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

ग्यारहवा सूत्र = उस परम शक्ति पर पूर्ण विश्वास रखें व अपने नियत कर्मों को पूर्ण आस्था व विश्वास से करें।

ऊपर जितने भी सूत्र मैंने आपको दिए हैं, वह मानव जीवन को सुचारु रुप से चलाने हेतु मेरे निजी अनुभव पर आधारित है, जो मैंने अब तक के जीवन में उतार चढ़ाव को महसूस किया, उस के बाद मैंने जो आवश्यक सुधार अपनाए है, उनका एक अच्छा परिणाम प्राप्त होने पर यह सूत्र मैंने आपके सामने रखे हैं। निर्णय आप ही करें कितना सही या गलत, पर आपसे निवेदन है बगैर किसी दुराग्रह के इन सूत्रों को मात्र महीने भर भी आप अमल में लाते हैं, तो आशातीत परिवर्तन महसूस करेंगे। आप की आंतरिक मानसिक शक्ति में अभिवृद्धि  होगी।

विशेष = धर्म से मेरा तात्पर्य स्वधर्म से भी है, आप जो भी कार्य, व्यवसाय या नौकरी कर रहे हैं, पूर्ण जागरुक ईमानदारी से अपने कर्तव्य निर्वहन को करें। निश्चित ही आप मानसिक संतुष्टि भी महसूस कर सकेंगे।

आपका अपना,
सुनील शर्मा।

प्रिय पाठकगण ,
सादर नमन ,

आप सभी का दिन शुभ व मंगलमय हो ,इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आइए चलते हैं अंतर्यात्रा के अगले पड़ाव पर आज हम बात करेंगे जीवनचर्या की, जीवन को किस प्रकार जिए ।

कुछ सूत्र जीवन को जीने के अवश्य बनाएं जो मेरी समझ में आया ,उस में सबसे महत्वपूर्ण है समय व उसकी कद्र ।आप देखिए जो व्यक्ति अपने समय की कद्र नहीं करता ,वह कभी भी कोई भी कार्य सही तरीके से नियोजित नहीं कर सकता ।

समय को अपने रोज की जीवन शैली में इस प्रकार डाले कि जिस में सर्वप्रथम स्वयं के स्वास्थ्य व अपने इष्ट की आराधना का समय अवश्य निकाल आप जिस भी शक्ति पर आस्था रखते हैं उस निराकार या साकार की उपासना व प्रार्थना का समय अवश्य निकाले ।
यह आपको मनोबल प्रदान करेगा ,द्वितीय है अपने कार्य को जो भी आप करते हैं ,नौकरी या व्यवसाय समय पर वह मन लगाकर पूर्ण आस्था से अपने कर्म को करें ।

कुछ समय अपने परिवार के लिए भी निकालें ,कुछ समय समाज की सेवा हेतु निकाले आप देखेंगे कि इस प्रकार के सही समायोजन से आप स्वयं को सदा ही स्फूर्ति का उत्साह से परिपूर्ण पाएंगे ।याद रखिए लक्ष्यहीन जीवन हमें कहीं का नहीं रखता जीवन में कुछ ना कुछ छोटे छोटे लक्ष्य जरूर तय करें व उनका पालन पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से करते चले ।

लक्ष्य जीवन में हमेशा बड़ा ही चुने फिर उसके लिए आवश्यक तैयारियों पर ध्यान दें व अपने संपूर्ण मनोबल को उस लक्ष्य की ओर मोड़ दे ,आप पाएंगे कि आप लक्ष्य के काफी पास में है ।धैर्य पूर्वक दिशा तय करें वह पूर्ण लगन से उसे करें ,आपकी जीत अवश्य होगी

सदा सकारात्मक चिंतन के साथ दिन की शुरुआत करें, हो सके तो सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठने का अभ्यास करें, यह आपकी मानसिक व शारीरिक दोनों ओर से सबलता प्रदान करता है सुबह जल्दी उठने से आपके पास समय भी अधिक होगा इस प्रकार अपनी जीवन चर्या को बनाएं जिसमें कुछ समय स्वयं के लिए फिर क्रमश में व्यवसाय या नौकरी परिवार व समाज इस प्रकार से अपने समय को समायोजित करें ।

विशेष :-समय का सदुपयोग ही सबसे बड़ी पूंजी है याद रखें बीता समय कभी भी लौट कर नहीं आता है समय बंधुता का अवश्य ध्यान रखें यह आपको जीवन में आगे की और बढ़ाता है

आपका अपना,
सुनील शर्मा।

प्रिय पाठकगण 
सादर नमन

आप सभी का दिन शुभ व मंगलमय हो ,इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अंतर्यात्रा का भाग 17 प्रस्तुत कर रहा हूं ।मां सरस्वती की कृपा से यह शब्द विचार आप सभी तक पहुंचा पाता हूं ,आज अंतर्यात्रा में हम विचार करेंगे सूक्ष्म शक्ति पर ,

जैसे ही हमारे चिंतन में शुभ विचार उत्पन्न होते हैं वह हमारे आभामंडल में वृद्धि करते हैं वह आभामंडल से सभी अपने आप ही आकर्षित हो जाते हैं ।अपने मानसिक भाव को निरंतर सुदृढ़ करते हुए उसके अनुकंपा से हम कार्य करते रहे हम केवल वास्तव में निमित्त ही होते हैं करने वाला व कराने वाला तो वही है ,उसकी कृपा शक्ति के बगैर हम एक पग भी नहीं बढ़ा सकते हैं ।अपने सभी कार्यों को उसकी शरणागति में रहते हुए कार्य करें ,उसकी शरणागति में रहते हुए कार्य करने पर आप एक अलौकिक आनंद का अनुभव कर करेंगे ।आप सब भी उस अलौकिक आनंद का अनुभव कर सकते हैं ,सच्चे व शुद्ध हृदय से उसकी शरणागत होकर जब हम कार्य करते हैं तो हमें हमारे कर्म का भार अनुभव नहीं होता। जब हम अपना अहंकार उसमें शामिल कर देते हैं तो वही कार्य हमारे लिए भार हो जाता है ।

आपने कई बार सुना होगा कि किसी भी कार्यक्रम में जो सार्वजनिक स्तर पर किए जाते हैं उनमें अंत में आभार प्रदर्शन किया जाता है ना कि भार प्रदर्शन इसका तात्पर्य है कि सारी प्रक्रिया ईश्वर कृपा से शुरू  हुई ,वह जिन भी महानुभाव ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग किया होता है सार्वजनिक मंच से उनका आभार प्रकट किया जाता है।

जब भी हम किसी कार्य को उत्साह व समर्पण से करते हैं ,औरों के मुकाबले हमें बेहतर परिणाम इसीलिए प्राप्त होते हैं ,क्योंकि हमारी सूक्ष्म और स्थूल दोनों ही शक्ति और कार्य में उत्साह निष्ठा से कार्य करती है और परिणाम चमत्कारिक होते हैं।मन को एकाग्र चित से एक लक्ष्य धारण करने से हम उसे निर्विघ्न रुप से संपन्न कर पाते हैं ।मार्ग की बाधाएं भी हमारे संकल्प की शक्ति से हटने लगती हैं, वही जो हमें बाधायें  लग रही थी वही हमारे कार्य को करने का उत्साह प्रदान करने लगती हैं।

पर उसके लिए हम जो भी लक्ष्य बनाएं पूर्ण निष्ठा से उसका पालन अवश्य करें ,ईश्वर निश्चित ही आपके कार्य में सहभागी बन कर औरों को भी आप से जुड़ने के लिए प्रेरणा प्रदान करेंगे

विशेष :-अपनी स्वयं की आस्था अपने लक्ष्य के प्रति रखें ,पूर्ण समर्पण निष्ठा से उसे करें आप अवश्य अपने लक्ष्य को पाएंगे ।

आपका अपना
सुनील शर्मा

प्रिय पाठक वृंद 
सादर नमन

आप सभी का दिन शुभ व मंगलमय हो इन्हीं शब्दों के साथ अंतर्यात्रा की कड़ी हम आगे बढ़ाते हैं

आज हम बात करेंगे शुद्ध विचार शक्ति का बल हमारे भाव नित्य शुद्ध हो इसलिए दैनिक प्रार्थना को जीवन का एक अंग बनाइए आप जिस भी इष्ट  को मानते हैं, उस से संपूर्ण सृष्टि की समृद्धि हेतु प्रार्थना करिए क्योंकि आप स्वयं उस विराट सृष्टि का एक छोटा सा हिस्सा ही तो है ।

प्रार्थना में अपरिमित शक्ति होती है ,स्वयं के अलावा सभी के मंगल हेतु प्रार्थना अवश्य करें हृदय से  सभी को धन्यवाद दे ,सभी का सहयोग प्रदान करने के लिए मन ही मन मानसिक धन्यवाद प्रदान करें।

आप देखेंगे कि इससे आपकी मानसिक ऊर्जा का संचार सुधरने लगता है और जब आप सभी के लिए प्रार्थना व कर्म कर रहे होते हैं सृष्टि की दिव्य शक्ति स्वयं आपकी सहायक होती है ।वह आपके अच्छे विचारों वह संकल्प का बल बन जाती है वह आप के अवरोधों को नष्ट कर देती है ।

प्रत्येक जीव अपनी अपनी मेहनत जिजीविषा से परिश्रम करते हुए अपना जीवन यापन करता है ।मूक प्राणियों की सहायता अवश्य करें ,बेबस और लाचार लोगों के लिए मन में दया और करुणा स्नेह का भाव रखें आपके स्वभाव से आप अपनों का ही नहीं वरन औरों का भी दिल जीतने में समर्थ होते हैं ,औरों का सहयोग करें यही जीवन की सच्ची जीवनी शक्ति है सदा सकारात्मक रहे ।  समय सदा ही परिवर्तनशील है अपनी उर्जा को सही दिशा में निरंतर बनाए रखें वह परमपिता आपके साथ सदैव खड़ा है।

उसे अपना सखा समझें अपनी कमजोरी अपने सपने में अदृश्य शक्ति से कहें वह शक्ति आप के लक्ष्यों में आपकी सहायता अवश्य करेंगी ,सर्वप्रथम हम जीवन में सदा सकारात्मक बर्ताव करें यह आपकी सबसे बड़ी आन्तरिक शक्ति है जिससे आप जितना चाहे उतना अपने प्रयत्नों से बढ़ा सकते हैं ,आपके विचार ही आप को ऊर्जावान व आभावान बनाते हैं ।

आप देदीप्यमान होते हैं एक शक्तिपुंज आपके भीतर निर्मित होने लगता है वह आन्तरिक चेतना आप से स्वयं ही कई कार्य संपादित करवा लेती है, निरंतर शुभ भाव आपके भीतर उत्साह का संचार करते हैं वह आपके उत्साह को बनाए रखते हैं आइए सकारात्मक चिंतन करें वह औरों को भी इसके लिए प्रेरित करें ।

जीवन में संघर्ष से घबराए ना वह तो श्री राम श्री कृष्ण जी के सामने भी आए थे परंतु उन्होंने उन सभी को सहज भाव से स्वीकार कर लिया सुख-दुख यह सब हमारे मन की उपज है हम इन दोनों में ही इनसे भी लगा कर अपने कर्म को संपूर्ण निष्ठा से करें जीवन में सफलता का यही मूल मंत्र है ।

विशेष :-संघर्ष जीवन को और अधिक मूल्यवान बनाते हैं और संघर्ष के कारण ही आप आगे बढ़ सकते हैं यह सत्य है जितना संघर्ष करते हैं उसके इतने अधिक सुपरिणाम स्वामी आप के पक्ष में खड़े होते हैं अपनी दिशा सदैव अपने लक्ष्य की ओर रखें

आपका अपना
सुनील शर्मा

प्रिय पाठक वृंद,
सादर नमन।

आप सभी का दिन शुभ व मंगलमय हो ,आज बात करेंगे प्रेम की शक्ति पर ,प्रेम में वह शक्ति है जो अपनों को तो अपना बनाती है वह गैरों को भी अपना बनाने की अनूठी ताकत रखती है ।आप प्रेम की अनूठी ताकत का एहसास अपने घर में भी महसूस कर सकते हैं ,जब आप अपने बच्चों के मुख पर मुस्कान देख लेते हैं तो स्वयं ही प्रसन्नचित हो जाते हैं ,बच्चे भी अपने माता पिता को खुश व प्रसन्न देखकर तो वह भी प्रसन्न रहते हैं। प्रेम में अपना बना लेने की अद्भुत शक्तश विराजमान होती है ,अपने अंतर को अगर संवारना है तो प्रेम की अद्भुत शक्ति व एक प्यारी सी मोहक मुस्कान का प्रयोग आप अपने दैनिक जीवन में करके देखिए ,आप एक चमत्कारिक सा बदलाव महसूस करेंगे आप अपने परिवार से अत्यंत प्रेम करते हैं तभी तो आप पूर्ण समर्पण भाव से परिवार का ही सोचते हैं

इसी प्रकार आप जब उस परमपिता के प्रेम व सानिध्य में अपने आप को रखते हैं तब तो यह जीव जगत वह आपके अपने व पराये सभी उस अनूठी स्पंदन धारा को महसूस कर अपने आप को सुरक्षित व आंतरिक उर्जा से युक्त पाते हैं ।याद रखिए आप भले ही भौतिक साधन संपन्न हो ,पर मधुर व्यवहार की कला से आप वाकिफ नहीं है तो आप के भौतिक संसाधन भी आपके लिए कुछ नहीं कर सकते

अगर आप अपने व्यक्तित्व में चुंबकीय आकर्षण उत्पन्न करना चाहते हैं तो आज से यह प्रयोग शुरु कर दीजिए स्नेह और प्रेम इन दोनों गुणों को आप निजी जीवन में उतार कर देखिए आपके स्नेहिल स्वभाव से सभी आपसे मिलकर प्रसन्नता का अनुभव करेंगे ।स्नेह, प्रेम ,मिलनसारिता ,सहयोग, सद्भाव आपसी सामंजस्यता सभी से मधुर व्यवहार यह आपके व्यक्तित्व में निखार लाते हैं ।आप जन जन में, परिवार व समाज में अपने मधुर व्यवहार से लोकप्रिय हो सकते हैं पर शर्त यही है कि आप अपने सच्चे हृदय से अपने जीवन का अभिन्न अंग बना ले आपको हार्दिक प्रसन्नता भी प्रदान करेगा वह आपसे जो भी मिलेगा वह भी आपके मधुर व्यवहार का कायल हो जाएगा

अंतर्मन में सभी के प्रति स्नेह की अवधारणा को रखने से आप के चित्त की आंतरिक शक्तियां जागृत हो कर आपके व्यक्तित्व को प्रभावी बनाने लगती है ।आपके विचारों का स्पंदन अत्यधिक शक्तिशाली होता है ,और यह अनोखे ढंग से आपके व्यक्तित्व को एक आत्मिक सौंदर्य प्रदान करता है उम्मीद है आप सभी को मेरी अंतर्यात्रा की यात्रा अवश्य पसंद आ रही होगी

विशेष : प्रेम व स्नेहिल स्वभाव से आप सभी का मन जीत सकते हैं मधुर व्यवहार आपके जीवन में आपकी सफलता की कुंजी है यह आपकी बहुत बडी ताकत है जो आपसे कोई चुरा नहीं सकता इसे अपने जीवन में अवश्य उतारे

आपका अपना,
सुनील शर्मा।