धैर्य जीवन का अंग

प्रिय पाठक गण,
सादर नमन, 
   आप सभी को मंगल प्रणाम, आज प्रवाह में हम बात करेंगे धैर्य जीवन का अंग, हम सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव, मान-अपमान, जय पराजय सभी आते ही हैं।
       ऐसा कोई मनुष्य नहीं, इसके जीवन में
संघर्ष ना रहा हो, जीवन का शुरुआती संघर्ष आपको आगे बढ़ाता है, धैर्य पूर्वक अपनी जीवन यात्रा को पूर्ण करें, उम्र के विविध पड़ाव अलग-अलग संकेत आपको प्रदान करते हैं।
   जैसे-जैसे आपकी उमर धीरे-धीरे बढ़ती है, मगर जीवन ऊर्जा घटती जाती है।
       अपने अनुभव से सीखे, वह धैर्य को हमेशा अपने जीवन का एक अनिवार्य अंग बना ले। जब भी कोई निर्णय करें, सोच समझकर करें, परिदृश्य को पूर्ण ईमानदारी व धैर्य पूर्वक समझे, फिर कोई भी फैसला करें, 
जीवन में कई बार आप जो चाहते हैं, वह नहीं होता, इसके बाद भी अपना धैर्य बनाए रखे,
विपरीत समय में अगर आप धैर्य बनाए रखेंगे 
तो जीवन की कई उलझनों से आप बच सकते हैं, निर्णय करते समय अगर आप धैर्य पूर्वक चीजों को समझते हैं, तो यह आपके साथ ही
आपके साथ जो भी है, उन्हें भी मुश्किलों से उबरने में सहयोग प्राप्त होगा, जब आप धैर्य धारण करते हैं, तो कई चीजे स्वत: सुलझ जाती है।
     कोई भी मामला हो, जब आपके भीतर आंतरिक धैर्यता का गुण अगर आपने विकसित कर लिया है, तो आप उसे विषय से संबंधित जो भी बातें हैं, उन्हें ठीक ढंग से समझ सकते हैं, और उनका निराकरण निकाल सकते हैं, निराकरण करते समय आपका धैर्य व सूझबूझ दोनों ही काम आते हैं, निरंतर धैर्य धारण करने से आपके भीतर ऐसी क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे आप स्थितियों को समझ कर फिर अपना कदम उठा सकते हैं। 
      इस प्रकार समस्या उत्पन्न होने पर हम निराकरण कर सकते हैं, समस्या कोई भी हो, 
सही ढंग से अगर हम समझे तो उसका निराकरण संभव है, किसी भी समस्या में आपकी संवाद की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है, आपसी संवाद द्वारा हम गलत फैमिलायों को दूर कर सकते हैं, और चीजों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
        जब हम धैर्यपूर्वक चीजों को समझते हैं,
तो हमारे पास उन सब बातों का जो हम करना चाहते हैं, रास्ता खुल जाता है, सभी पहलुओं को हम समझ पाते हैं, जीवन में 
सफलता व असफलता, दोनों ही आती है। 
           असफलता हमें और अधिक सिखाती है, हमारी स्वयं की क्षमता को और बेहतर करने की हमें शक्ति प्रदान करती है।
        जितना अधिक धैर्य हम में होगा, उतना ही हम बातों को ध्यान पूर्वक समझ कर उन्हें कर सकते हैं, आपसी संबंधों को भी हम एक मजबूत आधार प्रदान कर सकते है।
     जब हम पूर्णतया पारदर्शिता से अपनी बातों को रखते हैं, तो वह पारदर्शिता हमें सिखाती है, हम कैसे बातों को बेहतर ढंग से करें। 
        धैर्य वह कला है, जो हमारी बातों को हम कैसे पेश करें, उनका समाधान किस प्रकार निकाले, वह क्षमता हममें विकसित करती है।
विशेष:- धैर्य हमारा व्यक्तिगत गुण है, वह प्रतिकूल परिस्थितियों अगर उत्पन्न हो तो, 
उनका कैसे हम सामना करें, इसकी क्षमता हमें प्रदान करती है, निरंतर अगर हम धेर्य से कार्य करें, तो ऐसी जीवन की कोई भी समस्या नहीं है, जिसे हम सुलझा न सके। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद, 
वंदे मातरम।

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