दृष्टिकोण

प्रिय पाठक गण,
     सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, दृष्टिकोण पर, किसी भी विषय, कार्य के प्रति हमारा दृष्टिकोण किस प्रकार का है, सकारात्मक, 
नकारात्मक या संतुलित, देखा जाये तो पूर्ण सकरात्मक या पूर्ण नकारात्मक, दोनों ही 
दृष्टिकोण की बजाय एक संतुलित दृष्टिकोण या नजरिया हमें किसी कार्य विषय के बारे में
एक सही दृष्टिकोण प्रदान करता है, क्योंकि तब हम केवल सकारात्मक या नकारात्मक 
दोनों ही पहलुओं को जब एक संतुलित दृष्टिकोण से देखते हैं, तो हम एक बेहतर संभावना को जन्म देते हैं, क्योंकि जब हम दोनों पहलू देखते हैं, तो हम किसी भी कार्य या विषय को लेकर सही मंथन कर सकते हैं,
और जब हमारा नजरिया या दृष्टिकोण 
संतुलन वाला होगा, तो उसके परिणाम भी 
हमें उतने ही बेहतर प्राप्त होंगे।
         जब किसी भी विषय में हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक होगा, तो हम उसके हल के बारे में सोचेंगे, इसलिए निश्चित ही 
हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक दिशा में तो होना ही चाहिये, जब हम खेल के मैदान में उतरते हैं, तो हमें जीत की कल्पना के साथ ही उतरना चाहिये, लेकिन हमें सभी पहलुओं को ध्यान रखना चाहिये, एक किसान भी जब खेती करता है, तो सर्वप्रथम वह जमीन को सुधारता है, ऐसे ही जब भी हम किसी कार्य की शुरुआत करना हो, तो हमें भी हमारी  मनोभूमि को सबसे पहले सुधारना होगा,
उसमें अच्छे विचारों का हमें बीज बोना होगा,
मगर वह बीज भी तभी उत्पन्न होगा, जब जमीन अच्छी होगी, तो सर्वप्रथम तो हमें 
हमारे दृष्टिकोण में यह परिवर्तन लाना चाहिये,
स्थिति चाहे हमारे पक्ष में हो या विपक्ष में, हमें हमेशा एक सकारात्मक रूख के साथ ही उनका सामना करना चाहिये, क्योंकि सकारात्मक विचारधारा ही वह मनोभूमि है,
जहां अच्छे बीज पनप सकते हैं, व जब बीज अच्छे होंगे, जमीन अच्छी होगी, तो फसल तो निश्चित ही अच्छी होगी, मगर अच्छी फसल के लिए भी हमें समय-समय पर खरपतवार को हटाना होगा, तभी फसल श्रेष्ठ होगी। 
       इसी प्रकार किसी कार्य को करते समय भी सकारात्मक दृष्टिकोण से उसे शुरू करें, 
वह समय-समय पर जो नकारात्मकता नाम की खरपतवार आती है, उसे भी प्रयत्न करके हटाते जाए, ताकि हमें श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त हो।
विशेष:-  किसी भी विषय या कार्य के बारे में 
हमारा सकारात्मक दृष्टिकोण ही हमें औरों से अलग दिशा दे सकता है, क्योंकि जब हम सकारात्मक दृष्टि से सोचते हैं, तब हम परिणाम मूलक सोच की और अग्रसर होते हैं,
इसलिए दृष्टिकोण का जीवन में बड़ा ही महत्व है, व हमारा सकारात्मक दृष्टिकोण ही निरंतर हमें आगे की और ले जाता है। 
आपका अपना 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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