सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, निर्धारण शब्द पर, यह शब्द लगता तो छोटा सा है,
मगर इसके मायने गंभीर है।
आज हमारा जो जीवन है, वह किस प्रकार संचालित होगा, यह निर्धारण क्या हम स्वयं अपने विवेक से करते हैं, यह समाज,
पुरानी परिपाटी या विवशता, आर्थिक दबाव , कौन यह निर्धारण करेगा, हमारा जीवन किस दिशा में जाये, आज जो सामाजिक स्थिति है, इसमें हमारे सामने
आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक परिपाटी को चलाना, स्वयं की उन्नति पर ध्यान देना,
कड़ी प्रतिस्पर्धा, हमारे ऊंचे सपने, समाज का बदलता परिवेश, निरंतर बदलते मूल्य, ऐसे बहुत सारे कारण है, जो हमारे जीवन के
संचालन में , उसका स्वरूप कैसा होगा,
यह निर्धारण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम इनमें से किसी भी एक कारण को मुख्य नहीं मान सकते, हर एक कारण की
अपना एक महत्व है, जो निर्धारण में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है, पिछले कुछ समय से समाज में आर्थिक आधार को एक महत्वपूर्ण कारक जरूर माना जा सकता है,
जो हमारे जीवन, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक मूल्यों व व समाज में हमारे स्थान
का निर्धारण करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण
कारक के रूप में सामने आता है, आज समाज में आर्थिक पहलू सबसे पहले देखा जाता है, वह उसके सामाजिक स्तर के निर्धारण का सबसे बड़ा पैमाना है।
इस प्रकार हम देखते हैं, हमारा जीवन
केवल हम तय नहीं कर सकते, उसमें कई महत्वपूर्ण कारण ऐसे हैं, जो इस बात को निर्धारित करने में अपनी अपनी भूमिका
निभाते हैं, और समाज में हमारी भूमिका
हम किस प्रकार से बुद्धिमता पूर्वक अपने आप को स्थापित करते हैं, किस प्रकार
संघर्ष करते हैं, समाज में हमारी क्या भूमिका होगी, किस प्रकार का हमारा कद होगा, इसका निर्धारण होता है।
आज संपूर्ण विश्व एक दूसरे के सहयोग से संचालित है, तकनीकी व आर्थिक सहयोग
के लिए परस्पर एक दूसरे पर निर्भर है, इस प्रकार संपूर्ण विश्व मैं जो भी आर्थिक, राजनीतिक गतिविधियां है, वह एक दूसरे के
परस्पर सहयोग पर निर्भर है, विश्व में कोई
एक देश एक तरफा फैसला नहीं कर सकता,
क्योंकि वह संपूर्ण विश्व से जुड़ा है, अतः इसका निर्धारण करने में विश्व के समस्त देशो का
सहयोग व समर्थन भी चाहिये।
इस प्रकार हम पाते हैं निर्धारण जो भी होता है, चाहे वह परिवार में हो, व्यक्तिगत जीवन में हो, देश में हो, विश्व में हो, परस्पर सहयोग की भूमिका सबसे अधिक है, जितना अच्छा समन्वय होगा, उतने बेहतर परिणाम होंगे।
विशेष:- हमें जीवन में अपनी भूमिका का निर्धारण बहुत सोच समझ कर करना चाहिये,
क्योंकि इस पर हमारी उन्नति किस प्रकार होगी, यह तय होता है, बगैर किसी दबाव के
स्वतंत्र रूप से हम यह निर्णय करें या निर्धारित करें , हमें किस भूमिका का निर्वाह करना है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
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