युवाओं का दायित्व ( समसामयिक)

प्रिय पाठक गण,
  सादर वंदन,
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज हम चर्चा करेंगे, युवाओं के दायित्व पर, किसी भी देश की जो शक्ति है, वह युवा वर्ग है, अगर वही दिग्भ्रमित हो जाये, तो देश की शक्ति भी क्षीण होगी।
    आज हमारे देश में जो परिस्थितियों है, वह अचानक निर्मित नहीं हुई, हमारे देश में राजनीतिक दल अपनी जवाब देही को सही ढंग से समझ नहीं पाये, वे अपनी अधिकांश शक्ति एक दूसरे पर प्रत्यारोप लगाने में ही
खर्च करते रहे, और अभी तो यह परिदृश्य 
और अधिक उभर कर सामने आ रहा है, जिस देश में युवा वर्ग को रचनात्मक कार्यों में, देश के विकास में योगदान करना चाहिए, वह विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के रूप में अपनी शक्ति को क्षीण कर रहे हैं,
अब यह उचित समय आ गया है, युवा वर्ग अपनी राह स्वयं तय करें, इसके लिए उसे 
अपने प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए,
जहां गीता में भगवान श्री कृष्ण किसी भी प्रकार  के अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा हमें प्रदान करते हैं, वह हमें अपने मूल कर्म के प्रति सचेत करते हैं, वह हमें राह बताते हैं, अभी देश की जो परिस्थितियों चल रही है, उसमें हमें निर्णय करने की जो दुविधा उत्पन्न हो रही है, उसका सही जवाब हमें 
भगवत गीता के अध्ययन से मिल सकता है, 
जिसमें भगवान स्पष्ट रूप से कर्मों की व्याख्या करते हुए हमें निर्देश प्रदान करते हैं, युवा वर्ग को चाहिये, वह किसी भी राजनीतिक दल की कठपुतली न बने, स्वयं निर्णय करें, देशहित व सामाजिक हित में क्या अधिक उपयोगी है,
क्योंकि हम जिस भी देश व समाज में रहते हैं,
उनसे हमें आशा  तो होती है, मगर हमें अपने दायित्व भी पूरे करने होते हैं। 
विशेष:- युवा वर्ग वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में सजग व सतर्क रहकर अपना निर्णय करें, वह अपना मत स्वयं तय करें, उसे कौन सी दिशा की और जाना है, उसे अपने दायित्वों को समझना होगा, अपनी शक्ति का सही उपयोग देश व समाज के हित में करना होगा, और इसके लिए उसे धर्म ग्रंथो का अध्ययन भी करना होगा। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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