सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम बात करेंगे, 4 मई को घोषित चुनाव परिणामों पर, जो परिणाम घोषित हुए हैं, उसमें मतदाताओं नेअलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलो
की जीत का मार्ग प्रशस्त किया है, मतदाताओं की परिपक्वता दिखी है, इसमें एक चीज बिल्कुल साफ हुई है, जो भी सत्ताधारी दल हैं,
वह अगर सही तरीके से काम करते हैं तो ही सत्ता में वापस आते हैं, जहां असम में जनता ने सत्ताधारी दल पर विश्वास जताया है, वह पांडिचेरी में भी सत्ताधारी दल जीता है, अन्य तीन राज्यों में सत्ताधारी दल सुशासन देने में विफल रहा, व जनता ने सत्ताधारी दल को हराया है, तमिलनाडु में तो नई बनी पार्टी बहुमत के लगभग करीब हैं, यह लोकतंत्र में हमारी मतदाताओं की परिपक्वता को दर्शाता है, कि अगर उन्हें कहीं अच्छी संभावना नजर आती है, तो वह नए दलों को भी सत्ता प्रदान करने मे कोई चूक नहीं करते, इन चुनाव परिणामों ने एक एक बात तो यह साबित की है , जो भी राजनीतिक दल एकजुट होकर लड़े हैं, जिनका प्रबंधन अच्छा रहा है, वह विजयी रहे हैं, केरल राज्य में कांग्रेस वाले गठबंधन की वापसी इसका उदाहरण है, वहीं कांग्रेस
असम और पश्चिम बंगाल में विफल रही है,
वहीं तमिलनाडु में भी कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सकी, जो भी दल प्रतिबद्ध होकर लड़े हैं,
उन्हें अच्छे परिणामों की प्राप्ति हुई हैं, खासकर इन चुनावो से यह संदेश गया है कोई भी राजनीति में अपराजेय नहीं है, समय आने पर मतदाता सबको सबक सीखा ही देते हैं।
मतदाता अपने विवेक का पूर्ण इस्तेमाल करते हैं, यही भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाता है, यहां आज भी मतदाता राजा है,
यहां लोकतंत्र की जड़े गहरी एवं मजबूत है।
पुनः भारतीय मतदाताओं का विवेक से चयन करने के लिये आभार, एक जगह तमिलनाडु में नई राजनीति पार्टी को पूरा मौका देना, दूसरी और ममता बनर्जी की पराजय, केरल में कांग्रेस की वापसी, यह सब मतदाताओं की परिपक्वता को दर्शाते हैं, उन्होंने हर जगह स्थानीय तौर पर क्या अधिक ज्यादा जरूरी है उसे महत्व प्रदान किया।
विशेष:- भारतीय राजनीति एवं लोकतंत्र में
व्यक्तिगत विशेषताएं भी लोगों को प्रभावित
करती है, यह तमिलनाडु में विजयन का उदय दर्शाता है, लोकतंत्र और अधिक परिपक्व हो,
मतदाता और सजगता से निर्णय लें, यही उम्मीद।
आपका अपना
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
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