अनजाना भय

प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगें, अनजाना भय, हम सभी के जीवन में निरंतर उतार-चढ़ाव आते ही है, लेकिन हम उन उतार चढ़ाव से हार मान ले, हम सब कोई कदम तो उठाना चाहते हैं, मगर कई बार अनजाने भय का शिकार होते हैं, कदम उठाने से पहले ही हम अपनी कल्पना में ही कई प्रकार के विचारों को जन्म दे  देते हैं, जिनका वास्तव में कोई
अस्तित्व ही नहीं होता, जब तक हम इस प्रकार के अनजाने भय से मुक्त नहीं होते,
वहां हमारे जीवन की प्रगति में बाधक ही बना 
रहेगा। 
       कई बार सामाजिक भय , लोग क्या कहेंगे, इस कारण से भी हम कई बार कदम उठा नहीं पाते, जबकि उसका कोई उचित कारण भी नहीं होता है, हम केवल अपनी कल्पना में उसे स्थान प्रदान कर देते हैं, व कई बार यह भी देखने में आता है, कोई भी नया विचार या कदम उठाने से पहले ही हम
अनजाने भय से वह कदम उठा ही नहीं पाते हैं, हमें भय लगता है, इसका परिणाम क्या होगा, पर जब तक इस प्रकार के अनजाने भय से हम अपने आप को मुक्त नहीं करते, 
तब तक सफलता की सीढ़ी चढ़ता मुश्किल है, सबसे पहले हमें अपने आपको इस प्रकार के अनजाने भय से मुक्त करना होगा, ऐसा करेंगे तो वैसा होगा, वैसा करेंगे तो ऐसा होगा, इस प्रकार के परस्पर विरोधी विचारों से व भय से हमें अपने आप को दूर करना होगा, जो अपने जीवन में ऐसा कर पाता है, वही अपनी तरक्की के नए आयामों की और देख सकता है, जब तक अनजाने भय से हम अपने आप को पूर्ण रूप से मुक्त नहीं करते, वह हमारी ऊर्जा को क्षीण करता है,  पूर्ण ऊर्जा से जब तक किसी कार्य को हम नहीं करते, सफलता की संभावनाएं कम हो जाती है, इसलिए हमें चाहिए, काल्पनिक व अनजाने भय से हम सदैव दूर रहे, क्योंकि इस प्रकार के अनजाने भय, जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं होता, केवल हम कल्पना करते हुए उन्हें अपने जीवन में प्रवेश दे देते हैं, और यही हम चूक कर बैठते हैं, जब तक हम अनजाने भय से अपने आप को मुक्त नहीं करते, तब तक वह हमारे जीवन में बाधक बनकर हमें वह स्थान नहीं प्राप्त होने देंगे, जो हम इस प्रकार के भय से मुक्त होने पर प्राप्त कर सकते हैं, अपने मन से सभी प्रकार की शंकाओं को हटाये।
विशेष:- यह जीवन है, उतार-चढ़ाव हमेशा बने रहेंगे, हमें जीवन में अनजाने भय से सदैव सतर्क रहना चाहिये, ऐसे भय का कोई अस्तित्व नहीं होता, केवल यह हमारे मन की काल्पनिक उपज होते हैं, जीवन में अगर हमें आगे बढ़ना है, तो ऐसे अनजाने भय से हमें सदैव दूरी बनाना चाहिये, तभी हम अपने जीवन में तरक्की की और अग्रसर हो सकेंगे।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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