सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, परिचय शब्द पर, परिचय यह शब्द अपने आप में बड़ा महत्व रखता है, परिचित व्यक्ति यानी जाना-
पहचाना, जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं।
इस शब्द के कई अर्थ है, जैसे किसी की वाणी, व्यक्ति अपनी वाणी से क्या वार्तालाप करता है, किस प्रकार के शब्दों का चयन
करता है, इससे हमें उसके संस्कारों का परिचय मिलता है, हम कहीं पर जाएं, किसी कार्यक्रम में शामिल हो, और वहां कोई भी परिचित न हो, तो वह कार्यक्रम भी चाहे कितना ही अच्छा हो, हमें बेरंग सा लगता है।
परिचय हमें किससे बढ़ाना चाहिए, वैसे
व्यवहारिक सूत्र यह है, हमें सभी से परिचय
रखना चाहिये, मगर फिर भी हमें गुणीजन
व अपने से बेहतर लोगों से परिचय करना चाहिए, ताकि हमारी गरिमा मैं और अभिवृद्धि हो, क्योंकि जैसे लोगों से हमारा परिचय होगा,
उसी प्रकार की हमारी सामाजिक स्थिति निर्मित होगी। हमें किसी से भी परिचय करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, तुरंत किसी
का भी विश्वास न करके हमें परख कर फिर परिचय बढ़ाना चाहिए।
साथ ही हमें अपनी संतानों को भी इस बात की शिक्षा देंनी चाहिए, कि वे अपनी
संगति व परिचय हमेशा अच्छे गुणों वाले
व्यक्तियों से रखें, इससे हमें कुछ सीखने को भी मिलता है, परिचय हमेशा सोच समझ कर
जांच परख कर ही करें।
विशेष:- परिचय हमेशा सोच समझ कर व
गुणीजनों से ही करना चाहिए, बातचीत हम भले ही सबसे करें, लेकिन घनिष्ठ परिचय हमेशा गुणवान व अच्छे लोगों से करें, जिससे आपकी सामाजिक गरिमा में भी अभिवृद्धि होगी।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद
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