भ्रष्टाचार

प्रिय पाठक गण,
     सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
  आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगें, भ्रष्टाचार पर, 
हमारे देश में कई सरकारों ने कार्य किया, 
नगर भ्रष्टाचार पर कोई भी सरकार लगाम नहीं लगा सकी, इसका सबसे बड़ा कारण यह है, भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार का रूप ले चुका
है, आप किसी भी सरकारी विभाग में कोई कार्य नियम से करने के लिए जायेंगे, तो भी वहां पर नियम से कार्य होना मुश्किल ही है, 
क्योंकि वहां बीच के लोग जो बैठे हैं, जो इस भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं, उनकी सहायता लिए बगैर हम अपना कोई कार्य करा ही नहीं सकते, सब कुछ नियम पूर्वक होने पर भी
आपको भ्रष्टाचार रूपी देवता पर चढ़ावा तो चढ़ाना हीं पड़ता है।
     विश्व के 180 देशों में भ्रष्टाचार की जो सूची हैं, उसमें भारत का स्थान अभी भी 
96  वे स्थान पर है, आजादी के इतने वर्षों बाद भी भ्रष्टाचार ने देश को भीतर से जर्जर कर रखा है, इसके लिए हम सभी सामूहिक रूप से जवाबदार है, जब तक हम स्वयं इन बातों से समझौता करते रहेंगे, बदलाव संभव नहीं है, जनता जनार्दन ही अगर चाहे तो भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है, किसी भी प्रकार
के भ्रष्टाचार से समझौता न करें, ऐसा प्रण  सभी नागरिक ले ले, तब ही स्थिति में बदलाव आ सकता है, आईये, आज हम यह प्रण करें, 
ना तो स्वयं भ्रष्टाचार करेंगे, ऐसे लोगों का सहयोग करेंगे, अगर यह सब के भीतर भाव जाग उठे, वह ईमानदारी पूर्वक इस पर अमल
हो, तो अब भी तस्वीर बदल सकती है, अगर जनता अपनी पूर्ण इच्छा शक्ति से इस पर अमल करें, तभी यह संभव है। दिन पर दिन नहीं तो भ्रष्टाचार बढ़ता रहेगा, वह हम केवल देखते रहेंगे, जब तक हम आगे बढ़कर इसका मुकाबला नहीं करते, इसे हटाना संभव नहीं।
विशेष:-   जिस देश में भी भ्रष्टाचार होता है, देश भीतर से कमजोर हो जाता है, हमारे अपने देश के प्रति भी नैतिक जवाबदारी है,
वह हमें सचेत रहकर भ्रष्टाचार से मुकाबला
करना होगा, वरना भीतर ही भीतर भ्रष्टाचार 
दीमक की भांति इस देश को खोखला कर देगा , हम सभी का कर्तव्य है, हम जागे, जन जागरण के बिना इसका सफाया होना संभव नहीं। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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