प्रतिकूलता

प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, प्रतिकूलता पर, जीवन में हर समय अनुकूलता ही हो, यह संभव नहीं, लेकिन प्रतिकूलता हमें जीवन में अधिक सिखाती है, अनुकूल स्थिति में तो हर कोई अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है, मगर जब स्थितियां  प्रतिकूल हो, तब संघर्ष अधिक बढ़ जाता है, लेकिन वही संघर्ष हमें और अधिक निखारता भी है, इसलिए जीवन में 
प्रतिकूलताओं का स्वागत करें, वे आपके जीवन में आती ही इसलिए है, ताकि आप उनसे संघर्ष कर अपने आप को और निखार  सके, उदाहरण के तौर पर हम किसी खेल का उदाहरण  लेते हैं, जो खिलाड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता
है, उसकी ही जय- जयकार   होती है।
         जो व्यक्ति अपने जीवन में जितनी प्रति कूल स्थितियों का सामना करता है, उसके जीवन में अधिक संघर्ष के कारण सफलताएं भी और अधिक हासिल होती है, और प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष के कारण 
आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
      इतिहास गवाह है, जो भी प्रतिकूलताओं से घबराते नहीं, वही अपने जीवन में इतिहास रचते हैं, जितनी अधिक प्रतिकूल स्थितियों का सामना हम करेंगे, उतना ही संघर्ष भी बढ़ेगा, 
और संघर्ष बढ़ने के कारण हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ेगा, प्रतिकूल परिस्थितियों हमारा  व्यक्तित्व गढ़ने आती है, इसलिए 
प्रतिकूल परिस्थितियों का स्वागत करें व
जीवन में उपलब्धियो के लिए तैयार रहें।
       अनुकूल परिस्थितियों में तो हर कोई लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों होने पर भी हारता नहीं, दुनिया 
उसी की जयकार करती है, आप पाएंगे 
जो भी व्यक्ति अपने जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों से जितना अधिक गुजरा है,
उसके हिस्से में सफलताएं भी उतनी ही अधिक होती है। हम क्रिकेट का उदाहरण लेते
है, जब सब बल्लेबाज कम रन बनाते हैं, तब प्रतिकूल परिस्थितियों में जो बल्लेबाज अच्छे रन बनाता है, उसी की वाहवाही होती है।
और वह धीरे-धीरे प्रतिकूल परिस्थितियों में रन बनाने  के कारण सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज के रूप में स्थापित होता जाता है। ऐसा ही हमारा जीवन भी है, जितनी प्रतिकूलताओं का हम सामना करेंगे, उतनी ही सर्वश्रेष्ठ हमारी उपलब्धियां भी होगी।
विशेष:- प्रतिकूलता हमें जीवन में सिखाने के लिए आती है, इसलिए उनका हृदय से स्वागत करें, क्योंकि आपके जीवन में निखार लाने के लिए आई है, जितनी अधिक प्रतिकूल परिस्थितियों होगी, संघर्ष भी उतना ही होगा 
और उपलब्धियां भी फिर वैसी ही होगी।
आपका अपना 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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