स्मृति

प्रिय पाठक गण,
    सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे स्मृति पर, 
स्मृति यानी यादें, कुछ भूली-बिसरी, कुछ बचपन की, स्कूल की, बाल सखाओं की,
इस तरह अनेक प्रकार की स्मृतियां हमारे मस्तिष्क में हमेशा समाहित रहती हैं, ईश्वर का दिया यह ऐसा उपहार है, पुरानी अच्छी स्मृतियां हमें पूर्ण करो ताजा कर देती है, अगर हम विचार करें, किस प्रकार  पुरानी यादें भी 
हमारे मस्तिष्क में सुरक्षित रहती है।
        जैसे ही हम किसी पुरानी स्मृति को 
याद करते हैं, एक चलचित्र की भांति सब कुछ हमारे सामने पुनः आ जाता है, जैसे अभी की ही घटना हो, कितने भी काल पुरानी स्मृति हो, जैसे ही हम उसे याद करते हैं, हमारे सामने सजीव हो उठती है।
        लेकिन स्मृतियां तो स्मृतियो
 है, पर वह हमें पुनः उस दौर  में ले जाती है,
जहां से हम गुजरे थे, ये हमारे हाथ में है,हम
किन स्मृतियों को संजोना चाहते हैं, किन्हें भूलना चाहते हैं, कुछ खुशनुमा होती है, कुछ दुखद होती है, पर यह मानवीय स्वभाव है, 
वह हमेशा पुरानी स्मृतियों की और चल देता 
 हैं, हमेशा बचपन की यादें एक मधुर स्मृति के रूप में हमारे सामने होती है, तब हमारे मन में कोई छल कपट नहीं होता, वे स्मृतियां हमेशा हमारे मन में एक खुशनुमा अहसास पैदा कर देती है, मानव मन हमेशा से सुखद स्मृतियों को संजोये रखना चाहता है।
         हमारे जीवन में अनेक प्रसंग ऐसे होते हैं, जिनकी स्मृतियां हमें हमेशा प्रेरणा प्रदान करती है, हर व्यक्ति के जीवन में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी स्मृतियां भी 
उन्हें बल प्रदान करती है, हमेशा मधुर व सरल व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हमेशा हमारी मधुर स्मृतियों का एक हिस्सा होते हैं, जो हमें आज भी जब हम उन्हें याद करते हैं, हम तरो- ताजा हो उठते हैं। 
         स्मृतियां हमारे जीवन में अपना प्रभाव 
छोड़ती ही है, हम अपने व्यक्तित्व को ऐसा बनाएं, जब भी हम किसी की स्मृति का हिस्सा
हो, वह एक सुखद एहसास उसके जीवन में हो, यही हमारे जीवन की सार्थकता भी है।
मधुर स्मृतियों को हम जीवन में संजोये।
 विशेष:- हम अपना जीवन इस प्रकार जिये,
जब भी हम किसी की स्मृति में हो, उसे एक मधुर अहसास हो, ऐसे व्यक्तित्व के रूप में
अपना जीवन जिये, जिसे हर व्यक्ति अपनी स्मृति में रखना चाहता हो।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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