सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
मुझे पूर्ण उम्मीद है, विभिन्न विषयों पर किया गया यह वार्तालाप आपको पसंद आ रहा होगा, इसी श्रृंखला में हम चर्चा करेंगे,
आकर्षण शब्द पर, मनुष्य का स्वाभाविक रूप से प्रकृति के प्रति आकर्षण रहा है, तभी आप पाएंगे कि जितने भी मंदिर या सिद्ध स्थल हमें देखने को मिलेंगे, वह प्रकृति के अत्यंत निकट देखने को मिलेंगे, सौंदर्य के प्रति भी मनुष्य का आकर्षण शुरुआत से ही रहा है भगवान के मंदिर भी इसीलिए आकर्षक स्वरूप में बनाए जाते हैं, ताकि वहां हमारा मन रम सके, इसके अलावा मनुष्य का आकर्षण उन चीजों के प्रति अधिक होता है,
जिनसे वह अनभिज्ञ होता है, या जिन्हें वह नहीं जानता है।
विभिन्न कलाओं व संगीत के प्रति भी
आकर्षण मनुष्य का स्वाभाविक रूप से रहा है, जो हमें पुराने मंदिर व इमारतों के निर्माण में हमें देखने को प्राप्त होता है।
इसी प्रकार आज के समय में एक और आकर्षक है, वह है सत्ता का आकर्षण,
आज हर व्यक्ति सत्ता से जुड़ा रहना चाहता है, उसका आकर्षण उसे खींचता है।
इसके अलावा खेल व सिनेमा भी मनुष्य के आकर्षण के केंद्र रहे हैं, विभिन्न खेल गतिविधियां ,जो संचालित हो रही है, वह इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। ऐसे ही विभिन्न
वस्तुओं, खेलों व ऐसी कोई चीज, जिज्ञासा,
जो कुछ नया हमारे सामने लाती है, उसके प्रति भी हमारा आकर्षण स्वाभाविक रूप से होता है।
विशेष:- मनुष्य का आकर्षण कला, विज्ञान,
प्रकृति के सहज सौंदर्य की और शुरुआत से ही रहा है, और वे विभिन्न विषय, जो कोई नई जानकारी उपलब्ध कराते हैं, उनके प्रति भी
हमारा स्वाभाविक आकर्षण होता है।
आकर्षक एक स्वाभाविक प्रक्रिया है,
और यह मनुष्य मात्र में घटित होती है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
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