सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, उत्तरदायित्व पर, आज सभी और जो सबसे बड़ी खामी हमें देखने को मिलती है, वह है अपने उत्तरदायित्व से हर व्यक्ति, जो उस उत्तरदायित्व को निभाता हैं, जो उसे दिया गया है, उसका वह सही ढंग से निर्वाह नहीं करता, और इसका परिणाम यह होता है, कि हमें जो अपेक्षित परिणाम प्राप्त होना चाहिये, वह नहीं प्राप्त होते।
सोचिए ,अगर एक भी दिन प्रकृति अपने मूल उत्तरदायित्व का निर्वहन करने से इनकार कर दे, तो त्राहि-त्राहि मच जाएगी, फिर उसी प्रकृति से निर्मित हम अपने उत्तरदायित्व को क्यों नहीं निभाते।
अगर समाज में हर व्यक्ति, हर वर्ग अपने अपने उत्तरदायित्व का सही ढंग से निर्वाह करें, तो कई समस्याएं खड़ी ही नहीं होगी।
आज देश में हम शिक्षा के क्षेत्र को ही देखें,
अगर वह व्यवस्था सुचारू रूप से चलती, उसको चलाने वाले अपने उत्तरदायित्व का सही निर्वहन करते, तो जो यह देश में अभी
शिक्षा के संबंध में जो एक गिरावट देखने को मिली है, परीक्षा के पेपर के पेपर लीक हो रहे हैं, किसी को अपने उत्तरदायित्व का भान ही नहीं, सभी व्यक्ति अपने अपने मूल उत्तरदायित्व से भागना चाहते हैं, और उसका खामियाजा सारे समाज को भुगतना पड़ता है,
नेता अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं करते, और खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है, इसी प्रकार हम किसी भी वर्ग को
ले, जैसे व्यापारी अगर अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन सही ढंग से नहीं करते, तो खामियाजा ग्राहक को भुगतना पड़ता है। अगर समाज के सभी वर्ग अध्यापक, इंजीनियर, राजनेता, शिक्षक, व्यापारी, डॉक्टर व अन्य जो भी वर्ग है, वह सभी अपना अपना उत्तरदायित्व अगर संपूर्ण ईमानदारी से निभाए, तो संपूर्ण समाज उन्नति की ओर अग्रसर होगा।
विशेष:- कोई भी समाज तब उन्नति की और अग्रसर तभी होता है, जब समाज में अपने कर्तव्य के प्रति उत्तरदायी लोग अपने उत्तरदायित्व का सही ढंग से निर्वहन करते हैं।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
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