सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
मुझे उम्मीद है, विभिन्न विषयों पर यह जो मेरा आपसे वार्तालाप है, यह आपको पसंद आ रहा होगा, इसी श्रृंखला में अब हम आज बात करेंगे, नियति पर, अगर हम इस शब्द पर गौर करें, तो इस शब्द का जो अर्थ है, वह नियत से बना नियति, यानी हमारी नियत, हमारी सोच, जिस प्रकार की हमारी नियत या सोच होगी, अंततः वही हमारी नियति होगी, इसमें तनिक भी संदेह नहीं, हम जो भी करते हैं, उसके पीछे हमारी वास्तविक मंशा क्या है? हमें आखिर परिणाम उसी का प्राप्त होता है,
तो अगर हम हमारी नियत सही रखें, व अपने कार्यो को भी उसी अनुरूप करें, तो हमारी नियति निश्चित ही अच्छे परिणाम देने वाली होगी, देर सवेर हमें अंततः अपने ही कर्मों का परिणाम पलट कर वापस मिलता है, स्वर्ग नरक और कहीं नहीं, इसी जगह पर ही है, जो जैसा बोयेगा, अंततः वही फसल उसे काटना भी होगी, तो जिसकी जैसी नियत, वैसी उसकी नियति, यह अटल है, इसमें कोई फेर बदल की गुंजाइश नहीं, यह तो विधि का अटल विधान है, जो अंततः घटता ही है, मगर हम अपनी अल्प बुद्धि के कारण यह समझ नहीं पाते हैं, कि हमारी नियत ही हमारी नियति का निर्धारण करती है, तो हमें अच्छी नियत रखते हुए हमेशा अच्छे कर्मों की ओर अग्रसर होना चाहिए, परिणाम भले ही देर से प्राप्त हो, मगर वह अच्छे होंगे।
विशेष:- हमारी नियत या हमारी सोच जिस प्रकार की होंगी, वैसा ही हमारा आचरण भी होगा, और जैसा हमारा आचरण होगा, उसी के अनुरूप हमें परिणाम प्राप्त होंगे, और वही हमारी नियति भी होगी।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें