सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, सवाल जवाब पर, आज हमारे देश की जो परिस्थिति है,
वहां पर सवाल जवाब करना , यानी देश के खिलाफ हो जाना है, यह जो स्थिति है, यह किसी भी देश के उज्जवल भविष्य के लिये
ठीक नहीं, कोई भी एक राजनीतिक दल या उस दल द्वारा चलाया जा रहा कार्यक्रम, अगर उससे कोई असहमत है, तो वह उनसे सवाल-जवाब कर सके, इसी में प्रजातंत्र की खूबसूरती है, असली प्रजातांत्रिक देश वही है,
जहां हम सरकार की आलोचना भी कर सके
वह उसके सही फैसलों की प्रशंसा भी कर सके, उसके सरकार चलाने के तरीकों पर सवाल भी उठा सके, ओर सरकारे जो भी स्थिति हो, देश में उस समय, वे उनका जवाब भी दे।
असली प्रजातंत्र वही है, जहां हम अपने वैचारिक मतभेद को भी मुखरता से सामने
रख सके, निश्चित ही उन सवालों का उद्देश्य
हमारे देश की आर्थिक ,सामाजिक, राजनीतिक प्रगति से जुड़ा होना चाहिये, यही सच्चे लोकतंत्र की निशानी है, जो भी विपक्ष में है, उसे सरकार की स्वस्थ आलोचना का अधिकार होना ही चाहिए, सवाल जवाब
जब तक चलते रहेंगे, उनका उत्तर प्राप्त होता रहेगा, इस देश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था बनी रहेगी, जिस दिन आपका सवाल करने का अधिकार आपसे ले लिया जाये, या यह दबाव बनाया जाये, की जो भी वर्तमान सरकारें कर रही है ,उनका समर्थन करें, फिर चाहे उनकी दिशा सही हो अथवा नहीं।
क्या वर्तमान समय में कोई भी सरकार है, जो दावा कर सकती है, की सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का स्वरूप ले लिया है, निश्चित ही हम नागरिक भी इसके लिये दोषी है, जो इन बातों से समझौता कर लेते हैं, पर क्या जो भी सरकारे कार्य करती है उनकी कोई जवाबदारी नहीं, जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं, या तो अधिकारी का विभाग बदल दिया जाता है,
या कुछ समय के लिये बर्खास्त कर दिया जाता है, जब तक सरकारी घूस लेने वाले अधिकारी कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही
नहीं करती, बदलाव आना संभव नहीं, पर यहां भी राजनीतिक दलों के अपने स्वार्थ जुड़े होते हैं, इसलिए कार्यवाही की बजाय बचाव के तरीके ढूंढ लिए जाते हैं।
विशेष:- किसी भी देश की जनता को प्रजातांत्रिक प्रणाली में यह अधिकार है,
वह सवाल जवाब कर सके, और सरकारों का भी यह दायित्व है वह उनका जवाब दे, जब तक यह प्रक्रिया ठीक ढंग से चल रही है, तब तक प्रजातंत्र सुरक्षित है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
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