मापदंड

प्रिय पाठक गण,
सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
मेरे इस ब्लॉग पर आप सभी का हृदय से स्वागत, आज हम प्रवाह में चर्चा करेंगे, मापदंड पर, क्या हम अपना स्वयं का जीवन 
दूसरे के मापदंडों पर या समाज के मापदंडों पर आधारित रखते हैं, या हम स्वयं अपने लिए नए मापदंड तैयार करते हैं, हमारी अपनी प्रगति का आधार हम स्वयं तय करते हैं या सामाजिक मापदंड, जब ईश्वर ने हमको सभी को अलग-अलग गुण प्रदान किये, तो हम सभी को एक ही मापदंड से कैसे परख सकते हैं, यह तो प्रकृति की व उस परम पिता द्वारा प्रदत्त विविधता व विशिष्टता की भी अवहेलना  ही होगी।
       हमें अपने मापदंड स्वयं तय करने होंगे,
हमारे जीवन के लिए क्या अच्छा है, क्या बुरा, 
यह हम स्वयं तय करें, क्योंकि हम जीवन में जो भी करेंगे, अंततः उसके परिणाम हमें ही
प्राप्त होंगे, तो किसी और के मापदंड से हम अपने जीवन की दिशा क्यों तय करें, हमें अपने मापदंड व जीवन की दिशा स्वयं ही तय करना चाहिए। 
     जीवन हमारा है, तो लक्ष्य भी हमें ही तय करना होंगे, जो परिपाटी चली आ रही है, समय के अनुसार उनका आकलन भी होना चाहिए, नये मापदंड स्थापित होना चाहिए,
समय व काल के अनुसार, परिस्थितियों के आधार पर, नयी खोजो के कारण पुराने मापदंड में आवश्यक परिवर्तन भी जरूरी है।
जीवन में प्रगति का आधार सही सोच व समझ से तय होता है, और सही सोच व समझ ही हमारे मापदंड का आधार होना चाहिए। 
विशेष:- समाज में जो मापदंड बने हैं, उनका पुनरावलोकन होना जरूरी है, सभी मापदंड गलत भी नहीं है, मगर सभी आज के परिप्रेक्ष्य में खरे भी नहीं उतरते, वर्तमान काल के आधार पर क्या जरूरी है, क्या आवश्यक फेर बदल हो सकता है, जिससे हमारी प्रगति बाधित न हो, वह हमारे मापदंड का आधार होना चाहिए। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

0 टिप्पणियाँ: