सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, युवा पीढ़ी पर,
आज की युवा पीढ़ी स्वतंत्र विचारधारा वाली
व किसी भी कार्य को करने से पहले संपूर्ण रूप से विचार करने वाली है, वह पहले से कहीं अधिक सजग है, उसके अपने विचार
वह बिल्कुल स्पष्ट तरीके से परिवार व समाज के सामने रखती है, उनके मन में किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है, बिना किसी भय के
वह अपने विचारों को प्रस्तुत करती है, अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसले वह स्वयं देख परख कर करना चाहती है, राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर भी वह अपनी स्पष्ट राय रखती है, हो सकता है, पुरानी पीढ़ी व युवा पीढ़ी में वैचारिक मतभेद हो, मगर वह अपने
कर्तव्य भी बखूबी निभाना जानती है, विवाह जैसे गंभीर विषय पर भी वह सोच समझकर निर्णय करना चाहती है, केवल माता-पिता या परिवार के दबाव में वह कोई फैसला नहीं लेती, क्योंकि उन्हें मालूम है, यह उनके जीवन का एक ऐसा महत्वपूर्ण फैसला है, जिस पर उन्हें अपने जीवन साथी से वैचारिक साम्यता का होना आवश्यक है, और वह देख परख,
कर, आपस में अपने होने वाले जीवनसाथी से बात कर फिर इस बात का निर्णय करना चाहते हैं, और मेरी दृष्टि में यह सही भी है,
समय अनुकूल कुछ परिवर्तन हमें स्वीकार करना चाहिये, और उन्हें इस बात की इजाजत देना चाहिये, कि इस निर्णय पर उनका स्वयं का पूर्ण अधिकार हो, वे स्वतंत्र रूप से बगैर किसी दबाव के यह निर्णय ले, आज की युवा पीढ़ी ना तो अपने विचार किसी पर अनावश्यक रूप से मनवाना चाहती है, व
वह स्वयं भी किसी के वैचारिक दबाव में
नहीं आना चाहती।
युवा पीढ़ी आज के संदर्भ में क्या सही है,
क्या गलत है, इसका फैसला करना बखूबी जानती है, पुरानी पीढ़ी को उनका विश्वास करना चाहिये, व उनका हौसला बढ़ाना चाहिये, परिवर्तन समय के साथ आते ही हैं,
वह परिवर्तन हमें स्वीकार करना चाहिये।
विशेष:- आज की युवा पीढ़ी पढ़ी-लिखी,
स्वतंत्र विचारधारा वाली है, वह कोई भी कार्य करने से पहले उसके हर पहलू की जांच करती है, और यह तो अच्छी बात है, मगर इस बात के लिए भी युवा पीढ़ी को उत्तरदायी ठहराया जाता है, कि वह बुजुर्गों की बात नहीं मानती, युवा पीढ़ी दरअसल हर कार्य सोच समझकर करना चाहती है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।
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