दिशा व दशा

प्रिय पाठक गण,
    सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
  आज हम प्रवाह में चर्चा करेंगे, विषय है दिशा व दशा, हम सभी अपने जीवन में 
जब तक कोई एक दिशा तय नहीं करते, 
हमें किस दिशा में जाना है, क्या कार्य करना है? क्यों करना है? किस कार्य को करने का
क्या परिणाम हमें प्राप्त होगा? इन सब सवालों का जवाब हमें अपने आप से ही प्राप्त होगा, सर्वप्रथम हमें अपनी अभिरुचि किस विषय में है, किस दिशा की ओर हम आसानी से जा सकते हैं व सफलता हमारे कदम चूम सकती है, हम सभी को ईश्वर ने कोई न कोई 
विशिष्टता अवश्य प्रदान की है, और वही विशिष्टता हमें औरों से एक अलग शक्ति प्रदान करती है, हमें अपने भीतर छुपी उसी विशिष्ट प्रतिभा को पहचानना है, और उस पर कार्य करना है,  किसी की कला में रुचि
हो सकती है, किसी की गणित में रुचि हो सकती है, और किसी की खेलो में रुचि हो
सकती है, कुल मिलाकर मेरे कहने का तात्पर्य यह है, हमें अपनी क्षमता व अभिरुचि के अनुसार कार्य को चुनना चाहिये, क्योंकि जिस कार्य में हमारी रुचि होगी, हम उसे पूर्ण उत्साह से करेंगे, और इसीलिए परिणाम भी हमें अच्छा प्राप्त होगा, इसलिए जीवन में 
हमारी दिशा का सही होना बहुत जरूरी है,
तभी हमारी दशा में परिवर्तन होगा, सही दिशा ही हमारी दशा बदल सकती है।
विशेष:- हमें कोई भी कार्य या दिशा चुनते समय बड़ी ही सावधानी से उसका चुनाव करना चाहिये, और निरंतर फिर उस दिशा की और ही हमें बढना चाहिये।
आपका अपना 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

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